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< कृषि विभाग की उपकरण बैंक योजना >
July 26, 2020 • jainendra joshi • UNIVERSAL

 

<घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कृषि उत्पादों की मार्केटिंग ऐसे करने की जरूरत है कि उनकी उत्पादन लागत कम की जा
 
सके: श्री नितिन गडकरी>

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्री नितिन गडकरी ने आज कहा कि किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी) द्वारा पैदा किए

उत्पादों की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इस तरह से मार्केटिंग करने की जरूरत है जिससे उनकी उत्पादन लागत कम की

जा सके। वे “कृषि एमएसएमई क्षेत्र में क्लस्टर विकास” विषय पर नागपुर से एक वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर

पर राज्यसभा सांसद डॉ. विकास महात्मे, नागपुर के एमएसएमई विकास संस्थान के निदेशक डॉ. पारलेवार भी उपस्थित थे।

श्री गडकरी ने इस वेबिनार में हिस्सा लेने वाले अमरावती जिले के एफपीसी प्रतिनिधियों से अपील की कि वे इस बात पर ध्यान

दें कि कैसे उत्पादन को बढ़ाते हुए उसी दौरान उत्पादन की लागत और साथ-साथ परिवहन और श्रम खर्च को भी कम किया जा

सके। उन्होंने ये भी कहा कि उत्पादों की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता किए बिना उन्हें घरेलू बाजार में उपलब्ध कराया जाना

चाहिए। उन्होंने कहा कि उसके बाद अतिरिक्त बची उपज को देश के बाहर निर्यात किया जाना चाहिए।

श्री गडकरी ने ये भी सुझाव दिया कि किसानों द्वारा उत्पादन लागत को कम करने और प्रसंस्करण में उद्योगों द्वारा खर्च में

कटौती करने की प्रक्रिया इस उद्योग के लिए फायदेमंद साबित होगी। उन्होंने कहा कि दलहनों के मिल क्लस्टर के साथ कोई

किसान उत्पादक कंपनी सौर छतों, रेल द्वारा माल ढुलाई और शुष्क बंदरगाह के उपयोग से अपनी उत्पादन और परिवहन

लागतों को कम कर सकती है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग करने के बजाय कृषि कचरे से जैविक

उर्वरकों का उपयोग करके उत्पादन लागत को कम करने की अपील भी उन्होंने किसानों से की।

विदर्भ के प्रत्येक जिले में प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं जिनका उपयोग खादी और ग्रामोद्योग (केवीआईसी) विभाग द्वारा किया

जा सकता है और वो ऐसी किसान उत्पादक कंपनियों के लिए जिलेवार दृष्टिकोण तैयार कर सकता है। उन्होंने ये भी सुझाव

दिया कि किसान उत्पादक कंपनियां चंद्रपुर में उपलब्ध शहद, सिल्क से उत्पादों का निर्माण कर सकती हैं, अगरबत्ती के लिए

क्लस्टर चंद्रपुर और गढ़चिरौली जिले के बांस की खेती वाले बेल्ट में स्थापित किया जा सकता है। श्री गडकरी ने कृषि विभाग

की “उपकरण बैंक” योजना के बारे में भी बताया। इस योजना के तहत किसानों और किसान उत्पादक कंपनियों का समूह

उपकरण खरीद सकता है और किराये पर इनका उपयोग कर सकता है।

महाराष्ट्र के अमरावती जिले में 55 किसान उत्पादक कंपनियों के साथ 20,000 से अधिक किसान जुड़े हुए हैं और टाटा

इंटरनेशनल व वॉलमार्ट जैसी कंपनियों के साथ इनके उत्पादन की मार्केटिंग के लिए समझौते किए गए हैं। एमएसएमई विकास

संस्थान, नागपुर के निदेशक डॉ. पारलेवार ने बताया कि विदर्भ क्षेत्र में किसान उत्पादक कंपनियों की उपज के लिए आम

सुविधा केंद्र (सीएफसी) भी स्थापित किए जा रहे हैं।

इस वेबिनार के अंत में श्री नितिन गडकरी ने किसान उत्पादक कंपनियों के प्रतिनिधियों द्वारा संतरा प्रसंस्करण उद्योग और अन्य

विषयों के संबंध में किए गए प्रश्नों का जवाब दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे एफपीसी को कृषि

विभाग और एमएसएमई द्वारा उपलब्ध योजनाओं के बारे में बताने के लिए लॉकडाउन अवधि की समाप्ति के बाद वे एक

मार्गदर्शन सम्मेलन आयोजित करें। इस वेबिनार में विदर्भ की एक किसान उत्पादक कंपनी के प्रतिनिधियों और टाटा

इंटरनेशनल के अधिकारियों ने भाग लिया।