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<कोरोना कौन कर सकता है प्लाज्मा दान>
July 29, 2020 • jainendra joshi • MEDICAL AND HEALTH

 

 

 

 

 

 

 

कोरोना डिफिटर्स के प्लाज्मा दान से मिल सकता है जीवनदान
 
 
जयपुर चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि प्रदेश में कोरोना को हराने में प्लाज्मा थेरेपी बेहद कारगर साबित हुई है। ऐसे में
 
गंभीर रूप से पीड़ित लोगों के इलाज के प्लाज्मा की जरूरत रहती है। उन्होंने ‘कोरोना डिफिटर्स‘ को ज्यादा से ज्यादा तादात
 
में प्लाज्मा दान करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि कोरोना के दौर में ‘प्लाज्मा दान‘ ही सबसे बड़ा दान है।
 
डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रदेश में प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना के गंभीर मरीजों की शुरुआत प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मानसिंह
 
अस्पताल में की गई। इसका प्रयोग शतप्रतिशत सफल भी रहा। सफलता के साथ ही अन्य मेडिकल कॉलेजों द्वारा
 
आईसीएमआर से प्लाज्मा थेरेपी से इलाज की अनुमति मांगी गई। वर्तमान में जयपुर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर में प्लाज्मा
 
थेरेपी के जरिए मरीजों का इलाज कर उन्हें जीवनदान दिया जा रहा है। 
 
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्लाज्मा थेरेपी से इलाज के लिए बीकानेर और अजमेर को भी जल्द अनुमति मिल जाएगी। उन्होंने कहा
 
 
कि सरकार प्रत्येक जिला मुख्यालयों के अस्पतालों पर प्लाज्मा थेरेपी से इलाज कराने के लिए माइक्रो लेवल पर प्लानिंग कर
 
रही है। उन्होंने कहा कि यह सभी प्रभावी हो सकेगी, जब ज्यादा से ज्यादा ‘कोरोना डिफिटर्स‘ प्लाज्मा दान करेंगे। 
 
उन्होंने कहा कि सरकार ने प्लाज्मा थेरेपी की महत्ता को समझते हुए एसएमएस अस्पताल में पिछले दिनों प्लाज्मा बैंक की भी
 
स्थापना की है। उन्होंने कहा कि प्लाज्मा दान करने से कोई कमजोरी या परेशानी नहीं होती। इससे तो लोगों की जिंदगी बचाई
 
जा सकती है। 
 
कौन कर सकता है प्लाज्मा दान
 
चिकित्सा विषेषज्ञों के अनुसार 18 से 60 वर्ष की उम्र का कोई भी व्यक्ति, जो आरटीपीसीआर टेस्ट के जरिए बुखार और खांसी
 
के लक्षणों से कोरोना पॉजीटिव पाया गया हो और 14 दिनों के उपचार के बाद पॉजिटिव से नेगेटिव होकर आया हो। 
 
बिना लक्षण के मरीजों की समस्या
 
चिकित्सा मंत्री ने कहा कि वर्तमान में बिना किसी लक्षण के कोरोना संक्रमित सबसे बड़ी समस्या बने हुए हैं। उनकी पहचान कर
 
उनका उपचार करना ही सर्वाेच्च प्राथमिकता पर है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए सरकार ने 12 हजार
 
पल्स ऑक्सीमीटर की खरीदे जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ऐसे एसिंप्टोमेटिक लोगों की पहचान हो जाएगी तो
 
कोरोना के प्रसार पर खासा नियंत्रण किया जा सकता है।
 
प्रोटोकॉल के पालन से ही बचाव है संभव
 
डॉ. शर्मा ने कहा कि भले ही देश के मुकाबले प्रदेश में कोरोना का प्रसार कम है लेकिन इसे केवल सावधानी और सतर्कता से
 
ही रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जिला कलेक्टर्स से जरूरत के अनुसार स्थानीय लॉकडाउन लगाने के
 
निर्देश दे दिए गए हैं लेकिन यह इसका पुख्ता समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि आमजन कोरोना के प्रोटोकॉल का पालन
 
करेंगे, मसलन बिना जरूरत बाहर ना निकलना, मास्क लगाकर ही बाहर जाना, भीड़भाड़ या समूह में ना जाना, बार-बार साबुन
 
से हाथ धोना तभी कोरोना की बढ़ते कुचक्र को तोड़ा जा सकता है।