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<चंद्रशेखर आज़ाद जीवनी निबंध chandrashekhar azad essay life birth death freedom fighting>
July 23, 2020 • jainendra joshi • UNIVERSAL

 

 

 

 

महान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के शहीद चंद्रशेखर आजाद वह नाम से जिनके नाम से अंग्रेज डर  जाते थे चंद्रशेखर आजाद

भारत के प्रथम श्रेणी के स्वतंत्रा सेनानी कहे जाते हैं की तुलना महान भगत सिंह सुखदेव राजगुरु के बराबर की जाती है भारतीय

देश के युवा आज भी चंद्रशेखर आजाद को अपना आदर्श मानते हैं

चंद्रशेखर आजाद का जन्म मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा गांव में हुआ था आज उस गांव का नाम आजाद नगर के रूप

में जाना जाता है चंद्रशेखर आजाद जी बचपन से ही देशभक्त थे उनके पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी  माता का नाम

जगतानी देवी था और छोटी सी उम्र में ही चंद्रशेखर आजाद क्रांतिकारी दल हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन में शामिल हो

गए दल में उनका नाम क्विकसिल्वर तय पाया गया क्योंकि वह काफी तेज थी पार्टी की ओर से धन एकत्रित करने के जितने भी

कार्य चंद्रशेखर आजाद ने बड़ी बखूबी निभाए 

 

काकोरी ट्रेन डकैती और अंग्रेज अफसर सांडर्स की हत्या जैसे क्रांतिकारी कार्य में चंद्रशेखर आजाद की भूमिका बहुत

महत्वपूर्ण रही

चंद्रशेखर आजाद बचपन से ही गांधी जी के व्यक्तित्व से काफी प्रभावित है वह मानते थे कि गांधीजी का साथ देने से देश को

अंग्रेजों से मुक्ति मिल सकती है इसलिए वह बचपन में गांधी जी के द्वारा चलाए गए असहयोग  आंदोलन में भाग लेने के लिए

क्रांतिकारी कार्य में शामिल हो गए इस कार्य में चंद्रशेखर आजाद गिरफ्तार कर लिए गए और उन्हें जब मजिस्ट्रेट के सामने पेश

किया गया तब उनसे उनका नाम पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मेरा नाम आजाद है पिता का नाम पूछने पर उन्होंने कहा कि

मेरे पिता का नाम स्वतंत्रता है और मेरे घर का पता जेलखाना है उस समय चंद्रशेखर आजाद की उम्र काफी कम थी नाबालिक

होने के कारण उन्हें ज्यादा दंड नहीं दिया गया और 15 कोड़े माल मारने का आदेश हुआ हर कोड़े  की मार पर वह वंदे

मातरम वंदे मातरम का उद्घोष करने लगे इसके पश्चात वह सार्वजनिक रूप से चंद्रशेखर आजाद के नाम से मशहूर हुए

 

चंद्रशेखर आजाद की जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन तब  आया जब गांधी जी ने ऐसा योग आंदोलन को बंद कर दिया इससे

चंद्रशेखर आजाद को काफी निराशा हुई और वह क्रांतिकारी विचारधारा रखने वाले लोगों के संपर्क में आने की कोशिश करने

लगे इसी दौरान वह राम प्रसाद बिस्मिल के संपर्क में आए राम प्रसाद बिस्मिल उस समय के एक महान क्रांतिकारी स्वतंत्रता

सेनानी थे चंद्रशेखर आजाद बिस्मिल से बहुत प्रभावित हुए चंद्रशेखर आजाद कि देश के प्रति समर्पण और निष्ठा को पहचानने

के बाद बिस्मिल ने  आजाद को अपनी संस्था हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के प्रमुख सदस्य के रूप में शामिल कर लिया

चंद्रशेखर आजाद अपने साथियों के साथ संस्था के लिए धन एकत्रित करते थे ज्यादातर अंग्रेजी सरकार पर लूट पर एकत्रित

किया जाता था

 

1925 में काकोरी कांड के फल स्वरुप अशफाक उल्ला खान राम प्रसाद बिस्मिल सहित कई प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों को

अंग्रेज सरकार द्वारा मृत्युदंड दे दिया गया इसके कारण क्रांति दल काफी कमजोर पड़ गया के बाद चंद्रशेखर आजाद ने इस

संस्था को पुनर्जीवित किया चंद्रशेखर आजाद भगत सिंह सुखदेव राजगुरु के संपर्क में आए भगत सिंह के साथ मिलकर

चंद्रशेखर आजाद ने अंग्रेजी हुकूमत उत्तर भारत से खदेड़ने का हर संभव प्रयास किया

 

चंद्रशेखर आजाद ने मध्य प्रदेश मैं झांसी को अपना मुख्य क्षेत्र बनाया झांसी से 15 किलोमीटर दूर ओरछा के जंगलों में मैं अपने

साथियों के साथ निशानेबाजी किया करते थे अचूक निशानेबाज चंद्रशेखर आजाद ने दूसरे क्रांतिकारियों को भी  गोलीबारी

करना सिखाया यहां पर वह हरिशंकर ब्रह्मचारी के नाम से रहा करते थे

 

1936 में चंद्रशेखर आजाद गणेश गणेश शंकर विद्यार्थी से मिलने जेल गए तो विद्यार्थी ने उन्हें इलाहाबाद जाकर नेहरू से मिलने

को कहा चंद्रशेखर आजाद जब नेहरू से मिलने आनंदवन पहुंचे तो उन्होंने चंद्रशेखर की बात नहीं मानी इस पर चंद्रशेखर

आजाद अपने साथी सुखदेव के साथ वहां से निकल आए और पास ही अल्फ्रेड पार्क में चले गए सुखदेव के साथ आगे की बात

करी रहे थे इतनी देर में ही पुलिस ने पार्क  को चारों ओर से घेर लिया आजाद ने अपनी जेब से पिस्तौल निकालकर गोलियां

दागनी शुरू कर दी आजाद ने सुखदेव को सुरक्षित वहां से भगा दिया और खुद ही अंग्रेजों का सामना करने लगे दोनों ओर से

गोलीबारी हुई लेकिन एक गोली जब चंद्रशेखर आजाद के पिस्तौल में रह गई और उन्हें लगा कि अब मैं पुलिस का सामना नहीं

कर पाऊंगा या नहीं आएंगे इसी प्राण को निभाते हुए में 27 फरवरी 1931 को उन्होंने एक बलिदान कर दिया

 

चंद्रशेखर आजाद के प्रमुख वचन 

 

जिस राष्ट्र में चरित्र खोया  उसने सब कुछ खोया

मैं जीवन की अंतिम सांस तक देश के लिए शत्रु से लड़ता रहूंगा आजादी की लड़ाई में हथकड़ी लगाना बिल्कुल असंभव है एक

बार सरकार लगा चुकी अब तो शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे लेकिन जीवित रहते पुलिस बंदी नहीं बना सकती

 

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Chandrashekhar Tiwari

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shiv 

chandra shekhar azad death

 
cause of death -sucide 

डेथ ऑफ़ प्लेस -27 February 1931

चंद्रशेखर आज़ाद पार्क  प्रयागराज